खबर लहरिया Blog आइए जानें महोबा में मौजूद प्राचीन स्थानों के बारे में

आइए जानें महोबा में मौजूद प्राचीन स्थानों के बारे में

उत्तर प्रदेश का महोबा जिला अपने गौरवशाली इतिहास के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। महोबा बुंदेलखंड क्षेत्र के पास है और इस शहर का नाम “मोहत्सव” शब्द से रखा गया था, यही कारण है कि इसको त्योहारों का शहर भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि महोबा के खजुराहो मंदिर के साथ सांस्कृतिक संबंध हैं, जिसका प्रमाण हमें महोबा ज़िले की गलियों और कस्बों में देखने को भी मिल जाता है। खजुराहो से प्रेरित पुरानी इमारतें और मंदिरों में बनी चित्रकारी महोबा में मौजूद सांस्कृतिक धरोहर को साफ़ दर्शाती है। जैसा कि हम जानते हैं कि महोबा में कई दिलचस्प स्मारक, इमारत और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, तो आज हम उनमें से ही कुछ अनोखी और दिलचस्प जगहों के बारे में आपको बातएंगे।

1. राहिला सूर्य मंदिर

12वीं सदी में बना यह सूर्या मंदिर राजा राहुल देव बारमैन द्वारा बनवाया गया था और इसे विश्व का सबसे पुराना सूर्य मंदिर कहा जाता है। इस प्रचीन मंदिर की बनावट और इसमें इस्तेमाल किए गए पत्थरों की चमक देखने लायक है। यह न ही हमारी प्रचीन सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है बल्कि इस मंदिर से महोबा के पर्यटन विभाग को भी काफी फायदा होता है। इस मंदिर के पास में एक सूर्य कुंड भी मौजूद है जहाँ लोग स्नान करने आते हैं, और ऐसा माना जाता है कि उस कुंड का पानी कभी नहीं सूखता। तो अगली बार आप इस सूर्य मंदिर के दर्शन करने जाइएगा तो सूर्य कुंड का लुत्फ़ उठाना मत भूलिएगा।

2. देवी बड़ी चंद्रिका मंदिर

महोबा स्थित माँ चंद्रिका देवी का मंदिर भी हिन्दू प्राचीन इतिहास का ही एक प्रतीक है। यहाँ मौजूद माँ चंद्रिका की मूर्ती के दर्शन करने दूर-दूर से लोग आते हैं। नवरात्र के समय इस मंदिर की रौनक देखने योग्य होती है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि हज़ारों वर्षों पुराने इस मंदिर की दीवारें नवरात्र में अपने आप रंग और रौशनी बिखेरने लगती हैं। लोग कोई भी नया काम शुरू करने से पहले भी यहाँ माथा टेकने और चंद्रिका देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं।

3. कीरत सागर का कजली मेला

महोबा ज़िले में रक्षाबंधन के दूसरे दिन से लगने वाला कजली मेला ऐतिहासिक कीरत सागर के तट पर मनाया जाता है। रक्षाबंधन के अगले दिन जब विजय पर्व मनाया जाता है, उसी दिन इस मेले का भी आयोजन होता है। और लोगों का ऐसा मानना है कि दशकों पहले रक्षाबंधन के दूसरे दिन इसी तट पर महोबा के वीर आल्हा-ऊदल ने दिल्ली के पृथ्वी राज चौहान को युद्ध में हराया था, जिसके बाद से हर वर्ष यहाँ कजली मेले का आयोजन होने लग गया। कजली मेले में आपको बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए हर प्रकार के सामान मिल जाएंगे। इसके अलावा यहाँ मनोरंजन के लिए और भी कई कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किए जाते हैं। तो अब से रक्षाबंधन के अगले दिन कजली मेले में जाकर अपने परिवार के साथ आप ज़रूर मज़े करियेगा।

4. खखरामठ

खखरामठ

महोबा में मौजूद एक हज़ार वर्षों पुराना खखरामठ वैसे तो खंडहर में तब्दील हो गया था, लेकिन हाल ही में जिला प्रशासन ने इस मठ को वापस से इसकी चमक लौटाने के लिए कदम उठाए हैं। मदन सागर के बीचोबीच बने खखरामठ की सुंदरता लोगों को दिखाने के लिए प्रशासन ने एक फ्लोटिंग ब्रिज का निर्माण कराया है, जिसकी मदद से पर्यटक पानी के बीच से सुंदर नज़ारों का लुत्फ़ उठाते हुए खखरामठ तक पहुँच सकेंगे। इस जगह आप ग्रेनाइट के पत्थरों को वो खूबसूरत नक्काशी का आनंद उठा सकते हैं, जो आजकल के ज़माने में कम ही देखने को मिलती है।

5. विजय सागर पार्क

विजय सागर पार्क
महोबा के मशहूर मंदिरों और प्राचीन इमारतों से हटकर, यहाँ एक और काफी प्रसिद्ध स्थान है। विजय सागर पार्क पक्षी विहार के नाम से भी मशहूर है, और यह विजय सागर नामक झील के किनारे स्थित है। इस पक्षी विहार की असल खूबसूरती देखने के लिए लोग यहाँ सुबह-सुबह आते हैं। अलग-अलग पक्षियों की मीठी आवाज़ जब झील के सन्नाटे में मिलती है, तो मानो एक अलग सी ही ताज़गी आती है। इसके अलावा यहाँ मौजूद पक्षियों की अनेक प्रजातियां भी लोगों को अपनी और आकर्षित करती हैं। तो कभी आपको भी प्रकृति का यह सुन्दर नज़ारा देखना हो तो यहाँ ज़रूर जाइएगा।
अगली बार आप महोबा आने का सोचियेगा, तो इन जगहों पर घूमना मत भूलियेगा। इतिहास से चली आ रही हमारी यह धरोहरें ही तो भारत को बाकी देशों से अलग बनाती हैं, तो क्यों न हम इन जगहों का भरपूर लुत्फ़ उठाएं और अपने देश और महोबा ज़िले पर गर्व महसूर करें।
इस खबर को खबर लहरिया के लिए फाएज़ा हाशमी द्वारा लिखा गया है।