खबर लहरिया ताजा खबरें कभी सूखा तो कभी बाढ़ से परेशान हैं अन्नदाता

कभी सूखा तो कभी बाढ़ से परेशान हैं अन्नदाता

आखिर सरकारें कब लेंगी किसानों की सुध ?


संसद में पास हो चुके दो किसान बिलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की हलचल पूरे देश में फैल रही है कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद हो चुकी हैं कई राज्यों के किसान इन बिलों का विरोध कर रहे हैं हालांकि, ये बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो चुके हैं लेकिन अभी राष्ट्रपति ने इन विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जिससे कि यह अभी कानून नहीं बने

कलेक्ट्रेट के लगा रहे चक्कर पर क्या सुनी गई फ़रियाद?

किसानों को हर तरफ से निराशा और हताशा झेलनी पड़ती है। कभी बाढ़ की समस्या तो कभी सूखे की जिसकी वजह से किसान आये दिन सड़को पर होता है। महोबा जिले के कुछ किसानों की फसल बर्वाद हो गई थी जिसको लेकर किसान डीएम के पास आये थे। उनका फसल बीमा भी नहीं होता जिससे किसान बहुत परेशान हो जाते हैं।



सड़ गई 8 बीघे फसल बर्वाद 


   किसान धर्मजीत गुप्ता ने बताया कि हमारे यहाँ पानी नहीं बरसा जिससे हमारी उड़द, मूंग की बर्वाद हो चुकी है। कीड़ा लग गया है कृषि विभाग वाले सुन नहीं रहे। हमनें बीमा कराया था उसका फ़ार्म भी नहीं जमा कर रहें ताला लगा कर चले गये। हमने 8 बीघे फसल बोई थी। किसान बाबूलाल का कहना है कि अस्सी साल से किसानी हो रही हमारे घर में, लेकिन अब फसल नस्ट हो गई तो कैसे गुजारा चले। लाभ की बात करें तो कितने पैसे खर्च हो गये लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।

खेती छोड़ पलायन कर सकता है युवा 

   मुन्नालाल अहिरवार ने बताया कि फसल सारी नस्ट हो गई कहीं एक बूंद पानी नहीं है। फसल में फल ही नहीं आया है साफी कमाई बर्वाद गई। बर्वाद है किसान जिसके चार बच्चे हैं वो तो भूखे मर जाएगा। किसानी कौन करना चाहेगा ऐसी स्थिति में। बच्चों की पीढ़ी आएगी तो वो तो पलायन कर जायेंगे। अब इतना दूर आने का 25 सौ खर्चा हुआ गाड़ी का तेल अलग से लगा। फसल नस्ट हो गई मजदूरी ही एक मात्र सहारा है। सरकार से गुहार लगा सकते हैं पर कुछ कर नहीं सकते।

   सूपा के रहने वाले देवानंद सिंह राजपूत का कहना है की फसल नुकसान हुआ उसका दावा करने आये हैं लेकिन कृषि विभाग सुन नहीं रहा है। ऐसा बोला जा रहा की सर्वे होगा लेकिन लेखपाल बोल रहे ऐसा कोई आदेश नहीं है। अब प्रकृति भी साथ नहीं दे रही है सरकार भी साथ नहीं दे रही तो मज़बूरी में छोड़ना पड़ेगा।