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अवैध खनन से रुक रही नदी की जलधारा बचाने के लिए किसानों ने किया जल सत्याग्रह - KL Sandbox
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अवैध खनन से रुक रही नदी की जलधारा बचाने के लिए किसानों ने किया जल सत्याग्रह

अवैध खनन से रुक रही नदी की जलधारा बचाने के लिए किसानों ने किया जल सत्याग्रह

उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के 7 जिले आते हैं| पिछले एक दशक से सूखे की मार और पानी की कमी ने भले ही किसानों का जीना दुष्वार कर दिया हो और वह गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हो,लेकिन खनन माफियों ने यह इलाका पुरी तरह घेर लिया है| जिसके चलते बुंदेलखंड के बांदा जिले में बालू खनन का काम जोरों पर चल रहा है| जिससे नदियों की धारा, किसानों की जमीन और सड़क बहुत ही प्रभावित हो रही है| इसको बचाने के लिए आए दिन किसान और समाजसेवी लोग धरना प्रदर्शन कर नदियों में पानी के अन्दर बैठ कर जल सत्याग्रह अन्दोलन करते रहते हैं| जैसे की अभी हाल ही में 4 जून 2020 को बुंदेलखंड किसान यूनियन की अगुवाई में पथरा गांव के बागै नदी पर सैकड़ों किसानों ने मिलकर जल सत्याग्रह किया गया और इसके तीन दिन पहले पैलानी थाना क्षेत्र के खपटिहा कला गांव में केन नदी पर अवैध खनन रोकने के लिए महिलाओं ने जल सत्याग्रह किया|

बुंदेलखंड के बांदा जिले में पेयजल संकट और नदियों के अवैध खनन सहित और भी कई मांगों को लेकर बुंदेलखंड किसान यूनियन के किसान सालों से जल सत्याग्रह करते आ रहे हैं|
बांदा जिले के किसानों का कहना है की वैसे भी बुन्देलखण्ड बहुत ही पिछड़ा इलाका है| यहां का किसान पानी के संकट से हमेशा जूझता रहता है चाहे वह पेयजल का संकट हो या सिंचाई का संकट इसका मेन कारण है नदियों की जल धाराओं को खनन के माध्यम से रोक देना जिससे पानी के संकट के साथ पर्यावरण और किसानों की जमीन भी प्रदूषित होती है और इसका खामियाजा यहां की भोली-भाली जनता और किसानों को भोगना पड़ता है| इस कारण वह किसान नदी के बीच में खडे़ होकर जल सत्याग्रह आंदोलन के माध्यम से अपनी जमीन,सड़क और नदियों की धाराओं को बचाने के लिए प्रयास करते रहते हैं| बागै नदी में जल सत्याग्रह करते सैकड़ों किसानों ने अतर्रा एसडीएम के माध्यम से बांदा डीएम को भेजे गये ज्ञापन में कहा कि बागै नदी पर दो बालू खादान संचालित हैं उनके ठेकेदार अपने आवंटित सीमा से बाहर पथरा ग्राम पंचायत में करीब 800 मीटर तक किसानों के खेतों से खुदाई कर अवैध रूप से बालू निकल रहे हैं और नदी की जलधारा रोककर अवैध ढंग से खनन कर पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल कर रहे है| जिससे रातों दिन बडे़-बडे़ ट्रक और ट्रैक्टर ट्राली दौडा रही हैं और खनिज विभाग को करोड़ों रुपए की राजस्व हानि हो रही है| इस लिए अवैध खनन करने और पर्यावरण से छेड़छाड़ करने वालों पर एफ.आई.आर दर्ज कराई जाए और अब तक निकाली गई अवैध बालू की रिकवरी की जाए| अगर एफ.आई.आर नहीं दर्ज होती तो किसान चुप नहीं बैठेंगे अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे|

इसी तरह पैलानी थाना क्षेत्र के खपटिहा कला गांव में समाज सेविका ऊषा निषाद की अगुवाई में अवैध खनन रोकने के लिए महिलाओं ने नदी के अन्दर पानी में बैठ कर जल सत्याग्रह किया और पैलानी एसडीएम रामकुमार को ज्ञापन दिया|

जल सत्याग्रह कर रही महिलाओं का आरोप है कि खनन माफिया उनके खेतों से बालू निकाल रहे हैं| जिससे उनकी उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है और सड़के ध्वस्त हो रही हैं| इसको लेकर उन्होंने कुछ दिन पहले चित्रकूट धाम मंडल (कमिश्नर) गौरव दयाल से शिकायत की थी और उन्होंने डीएम बांदा को पत्र लिख कहा था कि किसानों की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध खनन न हो लेकिन इस आदेश का आज तक पालन नहीं हो सका| इस लिए वह महिलाएं पानी में जल सत्याग्रह आंदोलन करने को मजबूर हैं| क्योंकि उनके पास खेती ही मात्र एक भरण पोषण का साधन है| अगर अवैध खनन के चलते उन गरीब किसानों की खेती बर्बाद हो जाएगी तो फसल कैसे तैयार करेंगे और बहूत से लोग तो इस समय भी नदी किनारे खेतों में सब्जी की खेती कर अपना परिवार पाल रहे हैं| इस लिए वह चाहते हैं कि उनके खेतों से अवैध खनन न किया जाए| अगर ऐसा हुआ तो वह लोग आगे और भी बड़े कदम उठाएंगे| क्योंकि ऐसा नहीं है कि खनन के मामले से अधिकारी अनजान हैं,जब भी किसान जल सत्याग्रह आंदोलन करते हैं, तो अधिकारी वहां मौजूद होते हैं और जल सत्याग्रह रोकने के लिए उनको आश्वासन देते हैं| लेकिन आज तक अवैध खनन के मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए|

सोचने वाली बात यह है कि किसान पहले भी नदी की जलधारा रोकने,और पानी संकट से निजात पाने के साथ सड़क और अपनी जमीन बंजर होने से बचाने लिए धरना प्रदर्शन और नदी के अन्दर पानी में बैठ कर जल सत्याग्रह अन्दोलन कर चुके हैं,तो क्या इस जल सत्याग्रह अन्दोलन से जिले के प्रशासन पर किसी तरह का प्रभाव पड़ेगा या हमेशा की तरह अनसुनी और नजर अंदाज कर दिया जाएगा|

-गीता, चीफ रिपोर्टर